राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी'

राख सा दिखता हूँ, कभी आग बन जाऊंगा. टूटा हुआ सितार हूँ, कभी साज बन जाऊंगा. कलम टूटने के बाद स्याही बिखर जाती है, चुपचाप लिखता हूँ आज, कभी आवाज बन जाऊंगा..

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सपने: ओ बी ओ महोत्सव क्रमांक -18

Posted On: 20 Apr, 2012 में

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उनको भी नया सपना दिखाया जाये,
फिर मिट्टी में ही, उसको मिलाया जाये.
.
पिछले वादों का जब भी, हवाला वो दें,
यों ही प्यार से, ठेंगा दिखाया जाये.
.
क्या ताकत है, जज्बाती खयालातों में!
ये ‘राखी के धागों’ से, बताया जाये.
.
जिन लोगों ने, देखा जिंदगी में ख़्वाब,
उन्हें रातों को भी अब जगाया जाये.
.
आयी है मुबारक सी, घडी घर मेरे,
इक सपना जवाँ बेटे से बुनाया जाये.
.
बे सर पैर की ‘सच्ची’ खयाली बातें,
हमको फिर से बच्चों सा बनाया जाये.
.
लाखों सपने माँ की आँखों में बसने दो,
बेटी का चलो डोला उठाया जाये.
.
दादी माँ के, ‘वैसे ही रक्खे’ हैं सब किस्से,
दिल से चुन के, पोते को सुनाया जाये.
.
तेरी शख्शियत से इक है, सपना मुझ में,
काजल सा ये आँखों में, सजाया जाये.

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rakesh के द्वारा
April 24, 2012

dhanyvaad meenu ji.

shashibhushan1959 के द्वारा
April 24, 2012

मान्यवर राकेश जी, सादर ! खूबसूरत और निर्दोष रचना ! आत्मिक प्रसन्नता हुई ! हार्दिक धन्यवाद व शुभकामनाएं !

    Rakesh के द्वारा
    April 24, 2012

    Aadarneey Shashi ji, Sadar Namaskaar. Aashirvaad evam sarahnaa ke liye dhanyvaad.

minujha के द्वारा
April 24, 2012

बहुत सुंदर सपने राकेश जी

minujha के द्वारा
April 24, 2012

बहुत सुंदर सपने रोकेश जी

Rakesh के द्वारा
April 23, 2012

भाई अनिल जी, चंदनजी, अशोक जी एवं मान्यवर दिनेश जी, सादर धन्यवाद. आप लोगो को रचना से आनंद आया, लिखना सार्थक रहा.

चन्दन राय के द्वारा
April 21, 2012

राकेश भाई , क्या ताकत है, जज्बाती खयालातों में! ये ‘राखी के धागों’ से, बताया जाये. वाह वाह

akraktale के द्वारा
April 21, 2012

राकेश जी, सुन्दर रचना. प्रयास जारी रहे. बधाई.

dineshaastik के द्वारा
April 21, 2012

राकेश  जी मैं आपसे बहुत कुछ  सीखता हूँ, क्योंकि मुझे गजल  की बारीकियाँ नहीं आतीं। आप हर पंक्ति के भाव गहरे होते हैं। यह रचना भी इन गहरे भावों से  अछूती नहीं हैं। 

April 21, 2012

लाखों सपने में के आँखों में बसने दो, बेटी का चालों डोला उठाया जाय…………………………..आमीन!

Rakesh के द्वारा
April 20, 2012

आदरणीय प्रदीप जी, भाई आनंद जी, एवं जय प्रकाश जी, सादर धन्यवाद. आप लोगो का ही ये प्यार और प्रोत्साहन है की नयी नयी जगह पर जा कर विद्या अर्जन कर रहे हैं. हम सब लोग एक परिवार की तरह रहे यही कामना है.

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 20, 2012

राकेश भाई, नमस्कार लाजवाब प्रश्तुती……………..सुन्दर शब्दों से पिरोई हुई अर्थपूर्ण गजलें आप नित्य यूँही नए स्तंभों को छुते रहें…………..

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 20, 2012

उनको भी नया सपना दिखाया जाये, फिर मिट्टी में ही, उसको मिलाया जाये. . क्या ताकत है, जज्बाती खयालातों में! ये ‘राखी के धागों’ से, बताया जाये. . जिन लोगों ने, देखा जिंदगी में ख़्वाब, उन्हें रातों को भी अब जगाया जाये. . आयी है मुबारक सी, घडी घर मेरे, इक सपना जवाँ बेटे से बुनाया जाये. . बे सर पैर की ‘सच्ची’ खयाली बातें, हमको फिर से बच्चों सा बनाया जाये. . लाखों सपने माँ की आँखों में बसने दो, बेटी का चलो डोला उठाया जाये. .              वाह राकेश जी. बधाई के पात्र हैं आप

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 20, 2012

स्नेही राकेश जी, सादर सोना tapne पर ही निखरता है. बधाई, आशीर्वाद. tarakki hetu.


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